महाराजा बंदा वीर बैरागी

राम राम सभी 
स्वागत है आप सभी का इस कहानी पर 
महाराजा बंदा वीर जी का जन्म 16 अक्टूबर 1670 मे जम्मू कश्मीर के पूँछ जिले के एक छोटे से गांव तछल मे हुआ  उनका जन्म होने बाद उनका नाम लक्ष्मणदास रखा गया जब तो वह शिकार करने लगे एक दिन जब वह शिकार करने गए तो उनका तीर एक गर्भवती हिरण को लग गया और वह मर गई
 जिसके कारण लक्ष्मण दास को बहुत दुख हुआ और उन्होंने घर बार छोड़कर संन्यास लेने का निर्णय लिया संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपना नाम माधव दास बैरागी रखा और साधना मे लीन हो गए बाद मे इन्होंने अपनी कुटिआ नांदेड़ मे बनाई 
 और वहां रहकर भगवान के भक्ति करने लगे
 उन्हीं दिनों मुगलों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था किसी ने गुरु गोविंद सिंह जी को बांदा वीर वीरागी जी के बारे में बताया गुरु गोविंद सिंह जी ने बंदा वीर बैरागी से मुलाकात की और मुगलों के अत्याचार के बारे में सारी बातें बताई जब महाराज बंदा वीर बैरागी ने मुगलों के खिलाफ लड़ाइयां लड़ी उन्होंने अपना राजधानी लोहागढ़ को बनाया इन्होंने 91 लड़ाई लड़ी और एक भी नहीं हारे तब मुगलों ने उनके बच्चों को और इन्हें पकड़ लिया धोखे से और मुसलमान बनने के लिए बोलने लगे लेकिन महाराज बंदा वीर बैरागी ने उनकी शर्त नहीं मानी मुसलमान ने बंदा वीर बैरागी जी पर बहुत अत्याचार किया उनके मुंह में और उनके बच्चों का मांस का टुकड़ा ठोस दिया ताकि यह इस्लाम कबूल कर ले लेकिन इन्होंने उनकी बात नहीं मानी और आखिर में इन्हें और उनके साथ रहने वाले सभी सेनानियों को दिल्ली में लाकर मौत के घाट उतार दिया
 जिस दिन महाराजा बंदा वीर बैरागी जी शहीद हुए उस दिन   9 जून 1716 था यानी 9 जून को महाराज बंदा वीर बैरागी जी का शहीदी दिवस मनाया जाता है
 ऐसे महान पुरुष को शत-शत नमन 🙏🙏🙏

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